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bank ki retirement aur uske baad ki zindagi

बैंक की सेवा का हुआ समापन,  
धूप-छाँव में बिता समय सुहाना।  
रोज़गार की चिकनी राहें छोड़,  
अब वो देखे सपनों का आंगन।  

धन की गिनती से मिली आज़ादी,  
सुकून की छाँव में बसी है ख़ुशी।  
घर की बालकनी में हर सुबह,  
फूलों की खुशबू, दिल में बसी।  

संसार की भाग-दौड़ से दूर,  
मन को मिले अनंत सुरूर।  
रिटायरमेंट के इस नए सफर में,  
हर दिन लगे नया भरपूर।

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बैंक की सेवा का हुआ समापन, धूप-छाँव में बिता समय सुहाना। रोज़गार की चिकनी राहें छोड़, अब वो देखे सपनों का आंगन। धन की गिनती से मिली आज़ादी, सुकून की छाँव में बसी है ख़ुशी। घर की बालकनी में हर सुबह, फूलों की खुशबू, दिल में बसी। संसार की भाग-दौड़ से दूर, मन को मिले अनंत सुरूर। रिटायरमेंट के इस नए सफर में, हर दिन लगे नया भरपूर।

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