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bank se retirement ka akhiri din aur kaise mehnet karke paunche yahan tak woh yaadein anmol hai. patni ka sath bahumulay tha

निभाए वर्षों बैंक में, आज विश्राम का दिन आया,  
यादें सजीव हैं, मेहनत के हर कदम ने मुस्काया।  
खुद की राह बनाई, सपनों की डगर पर चले,  
पत्नी का साथ था, जैसे छांव में जलते दीपक तले।  

अनमोल वो पल, जो संघर्ष में सजाये गए,  
हर कठिनाई में हम दोनों ने हाथ थामे रह गए।  
अब सेवानिवृत्ति की बेला, नयी यात्रा का आरंभ,  
संग में यादें हैं, और जीवन का ये सुंदर अंतर्मुख।

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निभाए वर्षों बैंक में, आज विश्राम का दिन आया, यादें सजीव हैं, मेहनत के हर कदम ने मुस्काया। खुद की राह बनाई, सपनों की डगर पर चले, पत्नी का साथ था, जैसे छांव में जलते दीपक तले। अनमोल वो पल, जो संघर्ष में सजाये गए, हर कठिनाई में हम दोनों ने हाथ थामे रह गए। अब सेवानिवृत्ति की बेला, नयी यात्रा का आरंभ, संग में यादें हैं, और जीवन का ये सुंदर अंतर्मुख।

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