bachpan se bank ki naukri tak pahuchate huye bahut mehnet ki. mata pita aur patni ne iss safar mein khoob sath diya.
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बचपन की किलकारियों से लेकर,
बैंक की चौखट तक सफर मधुर,
मेहनत की राहों में बिछा संघर्ष,
सपनों का कारवाँ बनता है सुर।
माँ की ममता का साया था साथ,
पिता के विश्वास ने दिए पंख,
पत्नी की हंसी ने भरी ऊर्जा,
चल पड़ा मैं सच्चाई की डगर।
सपनों को साकार करने का जज़्बा,
संसार की मुश्किलें बन गई धुंध,
संगिनी के संग हर पल का आनंद,
जीवन की मधुरिम यात्रा में समृद्ध।