मुझे लगता है कि मैं आपको पहले से ज्यादा पसंद करना शुरू कर सकता हूं।
कविता की पृष्ठभूमि बदलें
तारों की जगमग में जो देखा था सपना,
धीरे-धीरे हो रहा है वो पूरा अपना।
दिल की धड़कन सुनाए नए सुर संग,
लगता है अब मन में उठ रहा है उमंग।
सोचता हूं कहीं तुमसे कहना न पड़े,
पर शब्द बिन ये दिल अब रहना न पड़े।
मिलते हैं जब नैन, खो जाता जहां,
और लगता है, रहे पलकों में सारा आसमां।
शायद इस सफर का यही हो इरादा,
तुम्हारे संग बिताऊं हर एक लम्हा प्यारा।
ऐसे ही रहो तुम मेरे करीब,
क्योंकि लगता है, मैं तुम्हें समझने लगा हूं करीब।