Aye ishq hame barbaad na kar, Pehale he bahut nashad hain hum
कविता की पृष्ठभूमि बदलें
ऐ इश्क़ हमें बर्बाद न कर,
पहले ही बहुत नाशाद हैं हम।
दिल के अंधेरों में मत जल,
तेरी रोशनी का नहीं इरादा है अब।
दर्द की लहरों में बहते हुए,
तिनका-सा अधूरा संवाद हैं हम।
ख़्वाबों के शीशे चटख चुके हैं,
बस खंडहरों में बसी याद हैं हम।
तेरे वादों की मोहलत में,
खो चुकी हर शहाद है अब।
ऐ इश्क़ हमें बर्बाद न कर,
पहले ही बहुत नाशाद हैं हम।