mera mann mere kaabu main hai main kuch bhi kar sakta hu
कविता की पृष्ठभूमि बदलें
मेरा मन मेरे काबू में है,
अब मैं कुछ भी कर सकता हूँ।
सपनों की ऊँचाई छूकर,
सितारों से बात कर सकता हूँ।
रुके न राह में कोई भी अड़चन,
हिम्मत की शक्ति भर सकता हूँ।
जीत की मुस्कान हर दिशा में,
अब मैं दस्तक दे सकता हूँ।
मन के इस मजबूत पंख से,
खुद को नये आयाम दे सकता हूँ।
काबू में रख कर अपने मन को,
दुनिया में चमत्कार कर सकता हूँ।