Contribution of women –Energy to India’s Development post Independence
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हौसला बनकर बढ़ती वो शक्ति,
हर कदम पर रचती नई सृष्टि।
स्वप्न दृष्टि में बुलंद इरादे,
देश की प्रगति में उनके वादे।
स्वतंत्रता की भोर में उभरी,
स्त्री की चेतना नव संकल्प धरी।
धड़कता भारत, उनके संग सजीव,
उनके बिना अधूरी हर तस्वीर।
शिक्षा की रोशनी से दीप्त होंठ,
विज्ञान में गूंजती उनकी प्रतिध्वनि।
कृषि की राह में परिवर्तन की धारा,
उद्योग में सृजन, उन्हें नया किनारा।
प्रगति के आकाश में उड़ान वो भरें,
संस्कृति और संगीत में रस घोलें।
महिला शक्ति, भारत की नई पहचान,
उनके बिन अधूरा हमारा अभिमान।