In the depths of silence where shadows prevail, A cry pierces the stillness—enough, we exclaim! For the essence of womanhood, a sisterhood must emerge, To shatter the bonds and reveal the muted pleas.
कविता की पृष्ठभूमि बदलें
चुप्पी की गहराई में, जहां परछाइयाँ छाई हैं,
एक चीख है उठती, जो खामोशी को चीरती है,
"बस करो!" हम पुकारें, अब और नहीं सहा जाए,
नारीत्व का अहसास है, अब यह बहनापा बनकर आए।
बंधन जो हमें रोकें, उन्हें अब हमें तोड़ना होगा,
दबी हुई हर पुकार को, हमें अब उजागर करना होगा।
साथ आओ सब मिलकर, एक नई राह बनानी है,
नारी की इस गीत को, दुनिया में गूंजानी है।