Within homes where affection ought to flourish, resentment takes root, Daughters, sisters, and mothers shrouded in despair. Respect, a shield crafted from the core, Will protect the vulnerable and dismantle their fears.
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घर के आँगन में जहाँ प्रेम का फूल खिलना चाहिए,
वहीं द्वेष की बेलें जड़ें जमाती हैं,
बेटियाँ, बहनें, माताएँ निराशा में लिपटी,
अपने ही घर में ओझल सी नज़र आती हैं।
सम्मान का कवच जब हृदय से गढ़ा जाएगा,
वो उनकी आशाओं का प्रहरी बन जाएगा,
डर के अंधेरों को जब कर्म का दीपक रोशन कर देगा,
तब जाकर ये घर सच में,
स्नेह का फूल खिला पाएगा।