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dost hi bada dushman hota hai, swarthi aur pakandi hota hai, pratidwandi hota hai

दोस्त ही बड़ा दुश्मन होता है,  
स्वार्थी मन का वो खेल,  
मुख पर हंसता, पीठ पर वार करे,  
छुपाए दिल के सब प्रश्नों का मेल।

वो परछाई बन साथ चले,  
पर नीयत में उसके खोट,  
जो दिखे नहीं, वही सच्चाई उसकी,  
हर कदम उसके में होता छोट।

प्रतिद्वंदी बनकर साथ चलता,  
हर बात में खोजे मुकाबला,  
दोस्त का लबादा ओढ़े वो,  
अंदर से हर पल छल की चाहत भरा।

इस दोस्ती के जाल में फंस न जाना,  
पहचान लो असलियत का रंग,  
दिल की नजर से देखो रिश्तों को,  
झूठी चमक से दूर रहना हर दंग।

कविता की पृष्ठभूमि बदलें

दोस्त ही बड़ा दुश्मन होता है, स्वार्थी मन का वो खेल, मुख पर हंसता, पीठ पर वार करे, छुपाए दिल के सब प्रश्नों का मेल। वो परछाई बन साथ चले, पर नीयत में उसके खोट, जो दिखे नहीं, वही सच्चाई उसकी, हर कदम उसके में होता छोट। प्रतिद्वंदी बनकर साथ चलता, हर बात में खोजे मुकाबला, दोस्त का लबादा ओढ़े वो, अंदर से हर पल छल की चाहत भरा। इस दोस्ती के जाल में फंस न जाना, पहचान लो असलियत का रंग, दिल की नजर से देखो रिश्तों को, झूठी चमक से दूर रहना हर दंग।