एक सैनिक ने युद्ध पर जाने से पहले अपनी मां, पिता, भाई, बहन और अपने जीवन के प्रेम को पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने कहा कि नहीं रोएं क्योंकि यह उनके जन्म का कर्तव्य है कि वे अपने देश के लिए लड़ें और उन्हें अपनी जिंदगी में इन लोगों के महत्व के बारे में बताया।
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प्रिय परिवार, प्रिय प्रेम, सुनो मेरा संदेश,
युद्ध पे जाने से पहले लिखता हूँ ये विशेष।
माँ, तेरी छांव में पलकर स्वप्न सँवारे,
तूने सिखाया मुझे हिम्मत के सहारे।
पिता, तेरे संघर्ष की गाथा अनमोल,
तेरी सीख ने बनाए मेरे कदमों को अमोल।
भाई, तेरे संग की मस्ती, यादों का खजाना,
साथ तेरे बिताया हर लम्हा सुहाना।
बहन, तू है स्नेह की वो बूँद निराली,
तेरी हंसी से खिलती गूँजती मेरी दिवाली।
मेरे प्रेम, तुमसे ही मेरा जीवन रंगीन,
तुम्हारे बिना ये सफर है अधूरा, क्षीण।
पर अब देश की पुकार है ज़िम्मेदारी,
रुठो मत, क्योंकि ये जन्म का फर्ज़ भारी।
मत बहाना आंसू, मत करो उदासी,
तुम सब में ही बसी है मेरी ख़ुशहाली।
वादा है लौटकर आऊँगा एक दिन,
जब शान्ति के परचम तले सजेगा जीवन।