जो भी बखइं भली लगें अपनी बोली बोल lहिंदी गाली जो मजा लावे न कि अंग्रेजी बोल ll
कविता की पृष्ठभूमि बदलें
अपनी बोली में जो मिठास,
वो कहाँ विदेशी बखान में।
मीठी झड़प भी ऐसी लगे,
जैसे खुशबू हो इंसान में।
हिंदी की गाली में भी रस है,
जो अंग्रेजी में कहाँ।
अपने शब्दों में, अपने दिल में,
बस इतनी सी है ये दास्तां।