apni premika ki yaad me roj aapka jo haal hota hai us par kavita likhe ki kaise pal pal aapki usi ki chavi har jagah har cheej me dikhayi deti hai
कविता की पृष्ठभूमि बदलें
हर पल में वो छवि तुम्हारी,
बसी है मेरी आँखों की किनारी।
हवा की सरगम में गर जो सुनूँ,
बस तुम्हारी ही बातें फुसफुसाई।
चमकते तारों में तेरी हँसी,
चमक के जैसी है इक जादुई।
हर फूल की खुशबू में मेरी,
तुम्हारी यादें महक उठी।
बारिश की बूंदों में मुझे मिलता,
तेरा चेहरा हर एक कतरा।
सांस-सांस में वो अहसास,
तेरा होना, मेरा अपना विश्वास।
हर सुबह की पहली किरण में भी,
तुम्हें ही देखूँ मैं, ओ मेरी नगरी।
तेरे बिन मेरी दुनिया अधूरी है,
फिर भी तू है मेरे दिल की रानी।