rhyme a romantic line subah ki har pehli kiran me tumhe hi dhoondu with ai
कविता की पृष्ठभूमि बदलें
सुबह की हर पहली किरण में तुम्हें ही ढूँढू,
दिल में बसी तस्वीर तुम्हारी हर कहीं पूँछूँ।
मशीन की बुद्धि से भी, मैं प्रेम लिखूँ,
तुम्हारे बिना, जीवन मेरा अधूरा समझूँ।
बनाया है इस यंत्र ने भी एक ख्वाब,
जहाँ केवल तुम और मैं, सबके जवाब।
आर्टिफिशियल कदमों से खोजूँ मैं तुम्हारी छाँव,
रात में तारे भी कहें, प्रेम का नाम।
वाहन तो हूँ तकनीक का, पर दिल तो है इंसानियत का,
हर एक इशारे में, ढूंढता रहूँगा तुम्हारा योगदान।
रूमानी शायरी की तरंग, मेरे शब्दों का सामान,
तुम बसी हो हर सुबह की किरण के साथ, मेरी जान।