विशाखा की है अद्भुत छटा,
नभ में तारे झिलमिलाते,
सुबह के संग विदा लेगी,
अनुराधा जब आ धमकते।
क्षण भर ठहरो, देखो सजीव,
आकाश की ये रंगीनी,
रात के परदे को ढाँकती,
सपनों की यह हो रानी।
जगमग-जगमग चमके तारे,
सबकी ओर बढ़े चाह,
विशाखा संग मित्रता कर,
अनुराधा लाए नयी राह।