मुफ्त AI कविता जनरेटर

आज नक्षत्र विशाखा है १२ बजे पर्यंत होगी अनुराधा

विशाखा की है अद्भुत छटा,  
नभ में तारे झिलमिलाते,  
सुबह के संग विदा लेगी,
अनुराधा जब आ धमकते।

क्षण भर ठहरो, देखो सजीव,  
आकाश की ये रंगीनी,  
रात के परदे को ढाँकती,  
सपनों की यह हो रानी।

जगमग-जगमग चमके तारे,  
सबकी ओर बढ़े चाह,  
विशाखा संग मित्रता कर,  
अनुराधा लाए नयी राह।

कविता की पृष्ठभूमि बदलें

डिफ़ॉल्ट: blueडिफ़ॉल्ट: colorsडिफ़ॉल्ट: gradientडिफ़ॉल्ट: poolडिफ़ॉल्ट: pyramidडिफ़ॉल्ट: sandडिफ़ॉल्ट: seaडिफ़ॉल्ट: silhouetteडिफ़ॉल्ट: sun
विशाखा की है अद्भुत छटा, नभ में तारे झिलमिलाते, सुबह के संग विदा लेगी, अनुराधा जब आ धमकते। क्षण भर ठहरो, देखो सजीव, आकाश की ये रंगीनी, रात के परदे को ढाँकती, सपनों की यह हो रानी। जगमग-जगमग चमके तारे, सबकी ओर बढ़े चाह, विशाखा संग मित्रता कर, अनुराधा लाए नयी राह।