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मेहंदीपुर के घाट पर, बालाजी का धाम,गुरुवर नरेश पुरी जी, करते सुंदर काम।मौन रहते हैं गुरुवर, मन में राम का नाम,हाथों में है काउंटर, जपते सुबह-शाम॥​[अंतरा 1]मंद हँसी मुख पर सजी, हो चाहे तूफान,बड़ी समस्या टल जाए, मिले सहज समाधान।आँखों से संदेश दें, बोलें न एक शब्द,हर पल रहते सचेत वे, जैसे हो कोई सिद्ध॥​[अंतरा 2]गहराई से सोचकर, हर काम को करते,बारीकी से हर बात का, पूरा ध्यान वे धरते।न चाहत है नाम की, न यश का है मान,मेहंदीपुर की उन्नति, बस यही है उनका ध्यान॥​[अंतरा 3]मंदिर का कायापलट, किया भव्य निर्माण,भक्ति की महिमा बड़ी, बढ़ी धाम की शान।श्रद्धालु आए लाखों, न हो कोई परेशानी,ऐसी सुंदर व्यवस्था, सब कहते हैं कहानी॥​[अंतरा 4]हर सुविधा का इंतजाम, भक्तों का रखा मान,सुरक्षित दर्शन पा रहे, बालाजी के धाम।स्वच्छता का ध्यान रखा, साफ रहे हर घाट,सफाई के प्रयासों से, चमक उठा है पाठ॥​[अंतरा 5]स्कूल-कॉलेज खोलकर, शिक्षा का दीप जलाया,मुफ्त बस्ता-वस्त्र देकर, बच्चों का भविष्य बनाया।राहों में रोशनी फैली, जगमग हुआ धाम,आना-जाना हो गया, सबके लिए आसान॥​[अंतरा 6]लगे कैमरे जगह-जगह, सुरक्षा का है मान,थाना बना के दौसा में, पुलिस को दिया सम्मान।मूक जीव भी पल रहे, सेवा का खुला द्वार,अस्पताल और जाँचघर, बने स्वास्थ्य का आधार॥​[अंतरा 7]प्रयागराज के कुंभ में, सेवा-शिविर महान,भोजन, कंबल बाँटकर, बढ़ाया मान-सम्मान।लंदन की संसद में गूँजी, हनुमत की चालीसा,सनातन संस्कृति का बढ़ा, जग में मान-बबीसा॥​[अंतरा 8]पेरिस, ऑक्सफोर्ड, ऑस्ट्रेलिया, गूँजी हनुमत शान,भारत गौरव अवार्ड से, बढ़ा विश्व में मान।दुबई में ग्लोबल स्पिरिचुअल, मिला बड़ा सम्मान,सेवा और साधना का, बढ़ा देश का नाम॥​[अंतरा 9]अयोध्या में रामलला के, प्राण-प्रतिष्ठा काज,लाख इक्यावन प्रसाद भेजे, सात हजार कंबल आज।देश-विदेश में नाम हुआ, फिर भी रहें विनम्र,सेवा ही गुरुवर की, सबसे बड़ा है धर्म॥​[समापन]गुरु पूर्णिमा के दिन, शीश नवाऊँ आज,जय हो गुरुवर आपकी, सदा रहे यह काज॥

मेहंदीपुर के घाट पर, बालाजी का धाम,  
गुरुवर नरेश पुरी जी, करते सुंदर काम।  
मौन रहते हैं गुरुवर, मन में राम का नाम,  
हाथों में है काउंटर, जपते सुबह-शाम॥

मंद हँसी मुख पर सजी, हो चाहे तूफान,  
बड़ी समस्या टल जाए, मिले सहज समाधान।  
आँखों से संदेश दें, बोलें न एक शब्द,  
हर पल रहते सचेत वे, जैसे हो कोई सिद्ध॥

गहराई से सोचकर, हर काम को करते,  
बारीकी से हर बात का, पूरा ध्यान वे धरते।  
न चाहत है नाम की, न यश का है मान,  
मेहंदीपुर की उन्नति, बस यही है उनका ध्यान॥

मंदिर का कायापलट, किया भव्य निर्माण,  
भक्ति की महिमा बड़ी, बढ़ी धाम की शान।  
श्रद्धालु आए लाखों, न हो कोई परेशानी,  
ऐसी सुंदर व्यवस्था, सब कहते हैं कहानी॥

हर सुविधा का इंतजाम, भक्तों का रखा मान,  
सुरक्षित दर्शन पा रहे, बालाजी के धाम।  
स्वच्छता का ध्यान रखा, साफ रहे हर घाट,  
सफाई के प्रयासों से, चमक उठा है पाठ॥

स्कूल-कॉलेज खोलकर, शिक्षा का दीप जलाया,  
मुफ्त बस्ता-वस्त्र देकर, बच्चों का भविष्य बनाया।  
राहों में रोशनी फैली, जगमग हुआ धाम,  
आना-जाना हो गया, सबके लिए आसान॥

लगे कैमरे जगह-जगह, सुरक्षा का है मान,  
थाना बना के दौसा में, पुलिस को दिया सम्मान।  
मूक जीव भी पल रहे, सेवा का खुला द्वार,  
अस्पताल और जाँचघर, बने स्वास्थ्य का आधार॥

प्रयागराज के कुंभ में, सेवा-शिविर महान,  
भोजन, कंबल बाँटकर, बढ़ाया मान-सम्मान।  
लंदन की संसद में गूँजी, हनुमत की चालीसा,  
सनातन संस्कृति का बढ़ा, जग में मान-बबीसा॥

पेरिस, ऑक्सफोर्ड, ऑस्ट्रेलिया, गूँजी हनुमत शान,  
भारत गौरव अवार्ड से, बढ़ा विश्व में मान।  
दुबई में ग्लोबल स्पिरिचुअल, मिला बड़ा सम्मान,  
सेवा और साधना का, बढ़ा देश का नाम॥

अयोध्या में रामलला के, प्राण-प्रतिष्ठा काज,  
लाख इक्यावन प्रसाद भेजे, सात हजार कंबल आज।  
देश-विदेश में नाम हुआ, फिर भी रहें विनम्र,  
सेवा ही गुरुवर की, सबसे बड़ा है धर्म॥

गुरु पूर्णिमा के दिन, शीश नवाऊँ आज,  
जय हो गुरुवर आपकी, सदा रहे यह काज॥

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मेहंदीपुर के घाट पर, बालाजी का धाम, गुरुवर नरेश पुरी जी, करते सुंदर काम। मौन रहते हैं गुरुवर, मन में राम का नाम, हाथों में है काउंटर, जपते सुबह-शाम॥ मंद हँसी मुख पर सजी, हो चाहे तूफान, बड़ी समस्या टल जाए, मिले सहज समाधान। आँखों से संदेश दें, बोलें न एक शब्द, हर पल रहते सचेत वे, जैसे हो कोई सिद्ध॥ गहराई से सोचकर, हर काम को करते, बारीकी से हर बात का, पूरा ध्यान वे धरते। न चाहत है नाम की, न यश का है मान, मेहंदीपुर की उन्नति, बस यही है उनका ध्यान॥ मंदिर का कायापलट, किया भव्य निर्माण, भक्ति की महिमा बड़ी, बढ़ी धाम की शान। श्रद्धालु आए लाखों, न हो कोई परेशानी, ऐसी सुंदर व्यवस्था, सब कहते हैं कहानी॥ हर सुविधा का इंतजाम, भक्तों का रखा मान, सुरक्षित दर्शन पा रहे, बालाजी के धाम। स्वच्छता का ध्यान रखा, साफ रहे हर घाट, सफाई के प्रयासों से, चमक उठा है पाठ॥ स्कूल-कॉलेज खोलकर, शिक्षा का दीप जलाया, मुफ्त बस्ता-वस्त्र देकर, बच्चों का भविष्य बनाया। राहों में रोशनी फैली, जगमग हुआ धाम, आना-जाना हो गया, सबके लिए आसान॥ लगे कैमरे जगह-जगह, सुरक्षा का है मान, थाना बना के दौसा में, पुलिस को दिया सम्मान। मूक जीव भी पल रहे, सेवा का खुला द्वार, अस्पताल और जाँचघर, बने स्वास्थ्य का आधार॥ प्रयागराज के कुंभ में, सेवा-शिविर महान, भोजन, कंबल बाँटकर, बढ़ाया मान-सम्मान। लंदन की संसद में गूँजी, हनुमत की चालीसा, सनातन संस्कृति का बढ़ा, जग में मान-बबीसा॥ पेरिस, ऑक्सफोर्ड, ऑस्ट्रेलिया, गूँजी हनुमत शान, भारत गौरव अवार्ड से, बढ़ा विश्व में मान। दुबई में ग्लोबल स्पिरिचुअल, मिला बड़ा सम्मान, सेवा और साधना का, बढ़ा देश का नाम॥ अयोध्या में रामलला के, प्राण-प्रतिष्ठा काज, लाख इक्यावन प्रसाद भेजे, सात हजार कंबल आज। देश-विदेश में नाम हुआ, फिर भी रहें विनम्र, सेवा ही गुरुवर की, सबसे बड़ा है धर्म॥ गुरु पूर्णिमा के दिन, शीश नवाऊँ आज, जय हो गुरुवर आपकी, सदा रहे यह काज॥