सुन्दर और सायानी थी वो,माला थी महारानी थी, कोड़े वाली रानी थी!रोहित के संग पड़ती थी वह रोहित के संग खेली थीप्रेम प्यार से चुम्बन करके दोनों की मस्ती अलबेली थीरोहित के सांवरिया रूप पे माला हुई दीवानी थीसुन्दर और सायानी थी वो,माला थी महारानी थी, वो कोड़े वाली रानी थीप्रेम प्यार से चुम्बन करके दोनों की मस्ती अलबेली थीसांवरिया रोहित के रूप pe माला हुई दीवानी थी सात साल तक खूब प्रेम से रोहित के संग वो मस्त हुई मस्तानी थीलेकिन रोहित की माँ ने अलग कर दिया दोनों को हुई परेशानी थी
कविता की पृष्ठभूमि बदलें
सुन्दर और सायानी थी वो,
माला थी महारानी थी,
कोड़े वाली रानी थी!
रोहित के संग पड़ती थी वह,
रोहित के संग खेली थी,
प्रेम प्यार से चुम्बन करके
दोनों की मस्ती अलबेली थी।
सांवरिया रोहित के रूप पे,
माला हुई दीवानी थी,
सात साल तक खूब प्रेम से,
रोहित के संग वो मस्त हुई,
मस्तानी थी।
लेकिन रोहित की माँ ने,
अलग कर दिया दोनों को,
हुई परेशानी थी।
फिर भी वो याद रहती है,
उस प्रेम कहानी का हर लम्हा,
अब भी सुन्दर और सायानी है,
माला की दिल की रानी थी।