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Prem pyaar se chuban karke dono ki masti albeli thi,सुन्दर और सायानी थी वो,माला थी महारानी थी, wo कोड़े वाली रानी थी!Mala ने Rohit को पाया,Jaise शिव से मिली भवानी थी।सुन्दर और सायानी थी वो,माला थी महारानी थी, कोड़े वाली रानी थी!रोहित के संग पड़ती थी वह रोहित के संग खेली थीप्रेम प्यार से चुम्बन करके दोनों की मस्ती अलबेली थीरोहित के सांवरिया रूप पे माला हुई दीवानी थीहुई rajan के साथ सगाई kashi में,ब्याह हुआ रानी बन आई mala vansi में,Itne mein hi Rajan aaya Mala अजब हैरानी थी।Mala Rohit ne usko slave banane ki thani thiख़ूब लड़ी मर्दानी वह तोझाँसी वाली रानी थी॥write a hindi poem parody to subhadra kumari Chauhan's poem on jhansi ki raani by changing it to as example below to make her husband a servant an ruled with strict punishment

झाँसी की रानी की कविता का बदलाव है यह कहानी,  
माला थी महारानी, वो कोड़े वाली रानी थी।  

सुंदरी और सायानी, मस्ती से भरी जवानी,  
रोहित को पाया उसने, जैसे शिव से मिली भवानी।  
रोहित का सांवरिया रूप, माला को लुभा गया,  
उसकी हँसी में खोकर, माला दीवानी हो गई।  

काशी में सगाई हुई, बाक़ि सब बहुत हैरानी थी,  
राजन संग ब्याह हुआ, वंसी में रानी बन आई।  
लेकिन माला की चालें, ऐसी थीं शैतानी सी,  
रच डाली उसने साज़िश, जो थी हैरानी वाली।  

रोहित को बनाया नौकर, और खुद संप्रभु बनी,  
उसकी हर बात मानी नहीं, करे जो मन में आई।  
माला की कोड़ा गूंज, सब देस ने सुनी थी,  
ख़ूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी सी।  

फिर एक दिन ऐसा आया, जब राजन भी छला गया,  
उसकी नगरी का पति, माला के पाँवों तले दबा।  
माला ने दिखाया जौहर, शासन की एक नई रवानी,  
वो कोड़े वाली रानी, राजन को भी समझाया सबक़।  

ऐसी थी वो कोड़े वाली झाँसी की माला रानी,  
जिसने तलवार रख दी और शासन अपना दिखला दिया।  
ख़ूब लड़ी मर्दानी वह तो नई झाँसी की रानी थी॥

कविता की पृष्ठभूमि बदलें

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झाँसी की रानी की कविता का बदलाव है यह कहानी, माला थी महारानी, वो कोड़े वाली रानी थी। सुंदरी और सायानी, मस्ती से भरी जवानी, रोहित को पाया उसने, जैसे शिव से मिली भवानी। रोहित का सांवरिया रूप, माला को लुभा गया, उसकी हँसी में खोकर, माला दीवानी हो गई। काशी में सगाई हुई, बाक़ि सब बहुत हैरानी थी, राजन संग ब्याह हुआ, वंसी में रानी बन आई। लेकिन माला की चालें, ऐसी थीं शैतानी सी, रच डाली उसने साज़िश, जो थी हैरानी वाली। रोहित को बनाया नौकर, और खुद संप्रभु बनी, उसकी हर बात मानी नहीं, करे जो मन में आई। माला की कोड़ा गूंज, सब देस ने सुनी थी, ख़ूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी सी। फिर एक दिन ऐसा आया, जब राजन भी छला गया, उसकी नगरी का पति, माला के पाँवों तले दबा। माला ने दिखाया जौहर, शासन की एक नई रवानी, वो कोड़े वाली रानी, राजन को भी समझाया सबक़। ऐसी थी वो कोड़े वाली झाँसी की माला रानी, जिसने तलवार रख दी और शासन अपना दिखला दिया। ख़ूब लड़ी मर्दानी वह तो नई झाँसी की रानी थी॥